भरकुआ और श्राद्ध

भरकुआ जिसे आपमें से सबो ने देखा होगा……एकदम हसमुख लगता है | उसके आगे के ४ दांत हमेशा बाहर की और दीखते हैं| जब वो बच्चा था तब दांत उतने बड़े नहीं थे…जब भी कोई मास्टरजी उसे डांटते थे तो वो सर नहीं उठाता था क्योंकि उसे हमेशा डर लगता था की मास्टर को यह नहीं लगे की वो उसकी डांट को मुस्कुराहटों में टाल रहा है| जब वो बड़ा हो गया तो उसकी पहली नौकरी पहरेदार के रूप में लगी | हर रात वो सोता रहता था अपने घर पर और चोर चोरियां करते थे इसलिए अंत में गाँव वालो ने मिलकर उसे निकाल दिया | जब वो पहरेदार था तब जब भी चोरी होती थी तो उसे गाँव की आमसभा में बुलाया जाता था और वो बेचारा चेहरे पे कपडे बांधकर जाता था एकदम बड़े बड़े क्रिमिनल्स की तरह ताकि कोई उसका चेहरा नहीं देख ले….क्योंकि एक बार गलती से उसने चोरी होने के बाद अपना चेहरा ऊपर किये रखा था और जिसके घर चोरी हुई उसे लगा की भरकुआ उसका मजाक बना रहा है तो उसने उसे पीट दिया…..तब से जब भी चोरी होती थी वो चेहरे पेकपड़ा बांधकर जाता था…

एक बार मुखिया की माँ सीढ़ियों से फिसलकर गिर गयी और महीने भर तक कराहने के बाद मर गयी…वो मुखिया की माँ ही नहीं बड़े मुखिया यानी अभी वाले मुखिया के बाप की बीबी भी थी…सभी काफी दुखी और सहानुभूत थे……सो पूरा पंचायत जमा हुआ था और उस माहौल में भरकुआ मुस्कुराता हुआ पकड़ा गया| गलती से उसे उसी ने देखा जिसने उसे अपने घर में चोरी होने के बाद मुस्कुराते हुए देखा था……उसका गुस्सा चरम पे आ गया और उसने फिर से भरकुआ की जमकर पिटाई कर दी…तब से भरकुआ किसी भी श्राद्ध में नहीं जाता था………

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